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तृणमूल ने विवादित चेहरों को फिर दिया टिकट : भाजपा


कोलकाता, 18 मार्च । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल इकाई की ओर से सॉल्ट लेक स्थित पार्टी कार्यालय में बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के मुख्य प्रवक्ता देवजीत सरकार ने राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि हाल ही में जारी तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार सूची राज्य की राजनीतिक स्थिति का महत्वपूर्ण प्रतिबिंब है। उनके अनुसार, सूची में कई विवादित और आरोपों में घिरे व्यक्तियों को फिर से उम्मीदवार बनाया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से प्रशासनिक भ्रष्टाचार और राजनीतिक प्रभाव के आरोपों के बावजूद उन्हीं चेहरों को दोबारा मौका दिया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि तृणमूल ने पार्टी और प्रशासन के बीच की सीमा को खत्म कर दिया है, जिससे प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित हुई है और लोकतांत्रिक ढांचा कमजोर पड़ा है।

डीए (महंगाई भत्ता) के मुद्दे पर राज्य सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद सरकार पूरी बकाया राशि का भुगतान नहीं कर रही है और इसे किस्तों में देने की योजना बना रही है, जो कर्मचारियों के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2008 से लंबित डीए को सीमित अवधि तक ही लागू किया जा रहा है और वह भी चरणबद्ध तरीके से। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में बकाया राशि सीधे देने के बजाय जनरल प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) में जमा करने का निर्णय लिया गया है, जिससे भुगतान में देरी होगी। साथ ही पेंशनभोगियों को भी सीमित लाभ देने की बात कही गई है।

देवजीत सरकार ने दावा किया कि कई सरकारी संस्थानों, पंचायतों और नगरपालिकाओं के कर्मचारियों को अब तक डीए को लेकर कोई स्पष्ट लाभ नहीं मिला है और मामला “विचाराधीन” रखा गया है।

उन्होंने कहा कि भारत का निर्वाचन आयोग द्वारा संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे बदलाव निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए आवश्यक हैं। उनके अनुसार, लंबे समय से प्रशासन और सत्तारूढ़ दल के बीच अंतर खत्म हो गया था, ऐसे में ये कदम अहम हैं।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक माहौल बहाल करने के लिए चुनाव प्रक्रिया को हिंसा-मुक्त बनाना जरूरी है और इसकी जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है।

अंत में उन्होंने दावा किया कि राज्य में बदलाव की मांग बढ़ रही है और आगामी चुनाव में जनता लोकतांत्रिक तरीके से अपना मत व्यक्त करेगी।